अच्छा ई सोचीं कि अगर समाज खाली सबद के असलील मनले रहत, या कौनो भाव या प्राकृतिक बेग के असलील मनले रहत त एतना निम्मन सामाजिक बेवस्था कहाँ से आइल रहत.
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