पटना के अलावा दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गया, नालंदा, वैशाली, मुंगेर, पूर्णिया, भागलपुर समेत 10 जिलों में डायल 112 काम करेगा। उसके बाद अन्य 28 जिलों में। अभी डायल 100 काम कर रहा है।
जिस तरह डीएसपी पीसीआर डायल 100, सीसीटीवी आदि के प्रभारी होते हैं तथा ट्रैफिक कंट्रोल के लिए एसपी व डीएसपी हैं, ठीक उसी तरह आने वाले दिनों में डायल 112 की मॉनिटरिंग के लिए डीएसपी स्तर के एक-दो अधिकारी तैनात किए जाएंगे।
इसके तहत पटना को 60 अलग-अलग एरिया में बांटा जाएगा और हरेक में पुलिस फोर्स वाली एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हिकल (ईआरवी) तैनात रहेगी। हरेक ईआरवी को एक किलोमीटर की परिधि में मूव करना है और इमरजेंसी में फंसने वाले व्यक्ति तक पहुंचना है।
पटना में दिसंबर से इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) काम करने लगेगा। राजधानी में ही इसका पहला ट्रायल होगा और यहीं कमांड सेंटर भी होगा।
इसके तहत 112 नंबर पर डायल करते ही फौरन पुलिस मदद को पहुंचेगी। इसमें फीडबैक भी लिया जाएगा कि पुलिस पहुंची कि नहीं। नई व्यवस्था में पुलिस का अधिकतम रिस्पॉन्स टाइम 10-15 मिनट होगा।
बड़ा फर्क यह कि डायल 112 के पास अपनी फोर्स होगी, वह डायल 100 की तरह थानों को सूचना फॉरवर्ड करने तक सीमित नहीं होगा। पुलिस के अलावा 112 फायर, एक्सीडेंट समेत किसी भी इमरजेंसी में इसपर कॉल करना होगा।
इस सिस्टम की पूरी तरह से सफल लांचिंग के बाद डायल 100 को खत्म कर दिया जाएगा। अग्निशमन के लिए भी डायल 112 ही काम करेगा, इसलिए 101 की सेवा भी इसके सफल ट्रायल के बाद बंद होगी।Reed all news

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