कहानी सपनों के टूटने की:16 साल में लोगों को एक भी घर नहीं दिया,जिस बोर्ड पर आम लोगों को घर देने का जिम्मा उसी के आवास-जमीन पर कब्जा, फिर कर्मियों के वेतन पर हर माह 1.20 करोड़ का खर्च क्यों? - NPBP NEWS

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Sunday, 5 September 2021

कहानी सपनों के टूटने की:16 साल में लोगों को एक भी घर नहीं दिया,जिस बोर्ड पर आम लोगों को घर देने का जिम्मा उसी के आवास-जमीन पर कब्जा, फिर कर्मियों के वेतन पर हर माह 1.20 करोड़ का खर्च क्यों?





बिहार सरकार ने, पब्लिक को ‘सस्ता-सुंदर घर’ का सबसे बड़ा सपना दिखाकर उसकी गर्दन मरोड़ दी। सरकार ने आदमी के इस सबसे सुनहरे अरमान को पूरा करने के लिए 49 साल पहले, यानी 1972 में बिहार राज्य आवास बोर्ड बनाया। इसे लोगों को किफायती दाम पर घर बनाने को जमीन और बना हुआ मकान देना था।

पटना, आरा, सासाराम, गया, पूर्णिया, भागलपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और छपरा में जमीनें ली गईं। बोर्ड के इस जिम्मा में नियोजित शहरीकरण का बड़ा उदेश्य भी शामिल था। शुरू में, जरूरत के मुताबिक बहुत कम ही सही, मगर काम हुए। लेकिन, बीते 16 साल में शायद ही किसी को घर या जमीन मिली है।Reed all news

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