
Bihar Politics: जनसंख्या नियंत्रण कानून (Population Control Act) और जातिगत जनगणना (Caste Based Census) दो ऐसे मुद्दे हैं जिसको लेकर बिहार में जेडीयू और राजद (RJD) के सुर एक हैं जबकि बीजेपी इससे ठीक उलट सोच रखती है. बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में भी निगाहें इसी मुद्दे पर होंगी.
बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र क्या जेडीयू (JDU) और राजद के लिए भविष्य में एक साथ आने का रास्ता खोल सकता है,
ये सवाल बिहार के सियासी गलियारे में उठने लगा है. सवाल उठने की ठोस वजह भी है
क्योंकि भले ही बिहार में एनडीए की सरकार चल रही है लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे है जिसे लेकर जेडीयू और भाजपा आमने सामने दिख रही है.
मामला तब और गम्भीर हो जाता है जब इसको लेकर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) धीरे-धीरे मुखर हो रहे हैं.
जब असम सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस कानून को लागू करने की बात कही थी
उसके बाद से ही भाजपा इस मुद्दे को लेकर बिहार में काफी मुखर थी, वहीं जेडीयू की तरफ से मोर्चा खुद नीतीश कुमार ने सम्भाल लिया है
और साफ-साफ लहजों में जेडीयू का स्टैंड क्लियर कर दिया है कि बिहार में ये कानून संभव नहीं है.
जरूरत है महिलाओं को शिक्षित करने की और बिहार सरकार इस रास्ते पर चल भी रही है जबकि भाजपा के फायर ब्रांड नेता बिहार में भी जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करना चाहते हैं.
बिहार सरकार के मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह कहते हैं कि हर पार्टी की राय अलग-अलग होती है, इसमें बुराई क्या है.
क्या इसके पहले धारा 370, अयोध्या विवाद जैसे मुद्दे पर भाजपा और JDU का रुख अलग-अलग नहीं था
लेकिन तब क्या दोनों की सरकार नहीं चली लेकिन भाजपा मानती है कि देश की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है उसके लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू होना ही चाहिए.
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