जिस मुंगेर की पहचान बंदुकें, उसका इतिहास भी गजब का:शक्तिपीठ माता चंडिका से मिलन करने आती है गंगा, लंका विजय के बाद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने किया था यहां स्नान - NPBP NEWS

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Saturday, 28 August 2021

जिस मुंगेर की पहचान बंदुकें, उसका इतिहास भी गजब का:शक्तिपीठ माता चंडिका से मिलन करने आती है गंगा, लंका विजय के बाद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने किया था यहां स्नान





गन फैक्ट्री के लिए प्रसिद्ध मुंगेर खुद में कई एतिहासिक पलों को समेटे है। 1834 में स्थापित मुंगेर रामायण और महाभारत की कथाओं से भी जुड़ा है। आज हम आपको बता रहे हैं मुंगेर से जुड़ी इन खास बातों को।


 यहां सीता माता के चरण चिन्ह बने हैं तो महाभारत के राजा कर्ण का महल भी है। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नवाब मीर कासिम द्वारा निर्मित सुरंग तो गंगा दर्शन के नाम से चर्चित योग विद्यालय 107 देशों में मुंगेर का परचम लहरा रहा


 है। वहीं, मुंगेर में गंगा नदी शक्तिपीठ माता चंडिका से मिलन करने आती है और फिर वापस चली जाती है।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने मुंगेर गंगा नदी के किनारे स्नान किया था। इस घाट को कुष्टहरणी घाट के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता थी कि इस घाट पर स्नान


 करने से कुष्ठ रोगियों के रोग दूर हो जाते थे। इसी घाट के निकट नवाब मीर कासिम द्वारा निर्मित सुरंग है। इन्होंने बंगाल में ब्रिटिश फौज से घिरने के बाद मुंगेर को अपना ठिकाना बनाया था, लेकिन पुनः मुंगेर जिला में घिरने के बाद


 हाथी पर बैठकर इसी सुरंग के रास्ते सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे थे।Reed all news

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